मोहित पूनम रंजन
पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी — ग्रामोत्थान, गौ-सेवा, 108 मंदिर निर्माण एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महा संकल्प
संस्थापक — मोहित पूनम रंजन
पत्रकारिता से समाज सेवा तक: ग्रामीण भारत के पुनरुत्थान और 108 पाषाण मंदिरों का पावन जन-संकल्प
मोहित पूनम रंजन
संस्थापक — श्रीआदिदेव चैरिटेबल ट्रस्ट (पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक एवं समाजसेवी)
“सेवा केवल दान देना नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति और गाँव को इतना सक्षम बनाना है कि वह सम्मान एवं आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ सके।”
मोहित पूनम रंजन एक पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों तक सक्रिय रहते हुए उन्होंने भारतीय राजनीति, सामाजिक मुद्दों और ग्रामीण भारत की चुनौतियों को निकटता से देखा और समझा। इसी अनुभव ने उन्हें समाज के लिए एक स्थायी और जमीनी पहल शुरू करने की प्रेरणा दी, जिसके परिणामस्वरूप श्रीआदिदेव चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना हुई।
मोहित का मानना है कि भारत की वास्तविक समृद्धि उसके गाँवों, किसानों, गौवंश, संस्कृति और आत्मनिर्भर ग्रामीण व्यवस्था में निहित है। उनके नेतृत्व में श्रीआदिदेव शिक्षा, स्वास्थ्य, गौ-सेवा, मंदिर निर्माण, पर्यावरण संरक्षण, जरूरतमंद परिवारों की सहायता और ग्रामीण रोजगार जैसे क्षेत्रों में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उनकी परिकल्पना केवल सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि गाँवों को आत्मनिर्भर बनाना है। “गाँव ही गौशाला है” और “समृद्ध गाँव, समृद्ध भारत” जैसे विचार इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं। गोबर एवं गोमूत्र से उपयोगी उत्पाद तैयार कर ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के अवसर उत्पन्न करना भी श्रीआदिदेव के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
आज जब लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं...
तब मोहित पूनम रंजन ने ग्राम-जीवन के पुनर्जागरण की एक अनूठी राह चुनी है
आज जब लोग आजीविका की तलाश में गाँवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, तब मोहित पूनम रंजन ने एक अलग और साहसिक राह चुनी है। उन्होंने सिर्फ एक पारंपरिक गौशाला बनाने का संकल्प नहीं लिया, बल्कि पूरे गाँव को गोद लेकर उसे “गौशाला ग्राम” में बदलने का ऐतिहासिक निर्णय किया है। यह कदम सिर्फ गायों की सेवा नहीं, बल्कि संपूर्ण ग्राम-जीवन के पुनर्जागरण की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी प्रयास है।
गौशाला क्यों, गाँव क्यों?
मोहित पूनम रंजन का मानना है कि गौशाला सिर्फ गायों का घर नहीं, बल्कि गाँव की आत्मा का मंदिर है। यदि हर घर में गाय होगी, तो हर व्यक्ति प्रकृति और धर्म दोनों से जुड़ जाएगा। इसलिए उन्होंने यह सोचा कि — “अगर हर गाँव खुद गौशाला बन जाए तो गायें भी सुरक्षित रहेंगी और गाँव भी समृद्ध होगा।”
“गौशाला बनाना केवल गायों के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए है।
जब गाँव आत्मनिर्भर बनेगा, तो भारत फिर से अपने असली स्वरूप में लौटेगा —
जहाँ न कोई भूखा होगा, न कोई बेसहारा।”
उनका लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में यह गाँव “गौ आधारित अर्थव्यवस्था” का ऐसा आदर्श उदाहरण बने, जहाँ हर परिवार खुशहाल हो, युवाओं को गाँव में ही सम्मानजनक रोज़गार मिले और हर खेत प्राकृतिक हरियाली व शुद्ध अन्न से भर जाए।
गौशाला से गाँव को कैसे मिलेगा समृद्धि का मार्ग?
मोहित पूनम रंजन द्वारा प्रतिपादित ग्रामीण पुनरुत्थान के 5 मुख्य आधार स्तंभ
आर्थिक आत्मनिर्भरता
गाँव में हर परिवार के पास गाय होगी, जिससे दूध, घी, दही और गोबर जैसे उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। स्थानीय दुग्ध उद्योग, बायोगैस और जैविक खाद से खर्च घटेगा और आमदनी बढ़ेगी।
रोज़गार के नए अवसर
गौसेवा, दूध संग्रह, पंचगव्य उत्पाद व जैविक खाद निर्माण से युवाओं को गाँव में ही रोजगार मिलेगा। महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों द्वारा गोबर से दीपक, मूर्ति व उपयोगी उत्पाद बना सकेंगी।
खेती में जैविक क्रांति
गोबर और गोमूत्र से तैयार प्राकृतिक खाद व कीटनाशक मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएंगे और रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाएंगे। इससे खेती की लागत घटेगी और जहरमुक्त फसल होगी।
पर्यावरण और ऊर्जा
गोबर से बायोगैस बनने से लकड़ी और एलपीजी की खपत कम होगी। गाँव में कचरा प्रबंधन होगा, प्रदूषण घटेगा और स्वस्थ, स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा।
संस्कृति का पुनर्जागरण
जब गाँव में गायें फिर से आदर और स्नेह की पात्र बनेंगी, तो सहयोग, करुणा और धर्म की भावना जीवित होगी। बच्चे संस्कारों से जुड़ेंगे और वृद्धों को सेवा का अवसर मिलेगा।
108 मंदिर एवं तुरी गाँव
पलामू के हरिहरगंज स्थित तुरी गाँव में प्रथम मंदिर निर्माण के साथ गाँव को गोद लेकर पहले आदर्श “गौशाला ग्राम” के रूप में विकसित किया जा रहा है।
प्रमुख समाचार पत्रों में संस्थापक का संकल्प
दैनिक भास्कर एवं प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित तुरी गाँव मंदिर व गौशाला ग्राम अभियान
माँ वैष्णो देवी के आशीर्वाद से
मोहित पूनम रंजन के इस पावन संकल्प से जुड़कर भारत के गाँवों को आत्मनिर्भर और सनातन संस्कृति को अमर बनाएं।
आपका छोटा सा समर्पण भी एक आदर्श गौशाला ग्राम और 108 पाषाण मंदिरों की नींव बन सकता है।