माँ वैष्णो देवी के आशीर्वाद से • 108 मंदिर निर्माण महाअभियान
संस्थापक — श्रीआदिदेव चैरिटेबल ट्रस्ट

मोहित पूनम रंजन

पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी — ग्रामोत्थान, गौ-सेवा, 108 मंदिर निर्माण एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महा संकल्प

मार्गदर्शक प्रेरणा

संस्थापक — मोहित पूनम रंजन

पत्रकारिता से समाज सेवा तक: ग्रामीण भारत के पुनरुत्थान और 108 पाषाण मंदिरों का पावन जन-संकल्प

दूरदर्शी सोच

आज जब लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं...

तब मोहित पूनम रंजन ने ग्राम-जीवन के पुनर्जागरण की एक अनूठी राह चुनी है

आज जब लोग आजीविका की तलाश में गाँवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, तब मोहित पूनम रंजन ने एक अलग और साहसिक राह चुनी है। उन्होंने सिर्फ एक पारंपरिक गौशाला बनाने का संकल्प नहीं लिया, बल्कि पूरे गाँव को गोद लेकर उसे “गौशाला ग्राम” में बदलने का ऐतिहासिक निर्णय किया है। यह कदम सिर्फ गायों की सेवा नहीं, बल्कि संपूर्ण ग्राम-जीवन के पुनर्जागरण की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी प्रयास है।

गौशाला क्यों, गाँव क्यों?

मोहित पूनम रंजन का मानना है कि गौशाला सिर्फ गायों का घर नहीं, बल्कि गाँव की आत्मा का मंदिर है। यदि हर घर में गाय होगी, तो हर व्यक्ति प्रकृति और धर्म दोनों से जुड़ जाएगा। इसलिए उन्होंने यह सोचा कि — “अगर हर गाँव खुद गौशाला बन जाए तो गायें भी सुरक्षित रहेंगी और गाँव भी समृद्ध होगा।”

“गौशाला बनाना केवल गायों के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए है।
जब गाँव आत्मनिर्भर बनेगा, तो भारत फिर से अपने असली स्वरूप में लौटेगा —
जहाँ न कोई भूखा होगा, न कोई बेसहारा।”
— मोहित पूनम रंजन (संस्थापक, श्रीआदिदेव चैरिटेबल ट्रस्ट)

उनका लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में यह गाँव “गौ आधारित अर्थव्यवस्था” का ऐसा आदर्श उदाहरण बने, जहाँ हर परिवार खुशहाल हो, युवाओं को गाँव में ही सम्मानजनक रोज़गार मिले और हर खेत प्राकृतिक हरियाली व शुद्ध अन्न से भर जाए।

आत्मनिर्भर ग्राम मॉडल

गौशाला से गाँव को कैसे मिलेगा समृद्धि का मार्ग?

मोहित पूनम रंजन द्वारा प्रतिपादित ग्रामीण पुनरुत्थान के 5 मुख्य आधार स्तंभ

1️⃣

आर्थिक आत्मनिर्भरता

गाँव में हर परिवार के पास गाय होगी, जिससे दूध, घी, दही और गोबर जैसे उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। स्थानीय दुग्ध उद्योग, बायोगैस और जैविक खाद से खर्च घटेगा और आमदनी बढ़ेगी।

2.

रोज़गार के नए अवसर

गौसेवा, दूध संग्रह, पंचगव्य उत्पाद व जैविक खाद निर्माण से युवाओं को गाँव में ही रोजगार मिलेगा। महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों द्वारा गोबर से दीपक, मूर्ति व उपयोगी उत्पाद बना सकेंगी।

3️⃣

खेती में जैविक क्रांति

गोबर और गोमूत्र से तैयार प्राकृतिक खाद व कीटनाशक मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएंगे और रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाएंगे। इससे खेती की लागत घटेगी और जहरमुक्त फसल होगी।

4️⃣

पर्यावरण और ऊर्जा

गोबर से बायोगैस बनने से लकड़ी और एलपीजी की खपत कम होगी। गाँव में कचरा प्रबंधन होगा, प्रदूषण घटेगा और स्वस्थ, स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा।

5️⃣

संस्कृति का पुनर्जागरण

जब गाँव में गायें फिर से आदर और स्नेह की पात्र बनेंगी, तो सहयोग, करुणा और धर्म की भावना जीवित होगी। बच्चे संस्कारों से जुड़ेंगे और वृद्धों को सेवा का अवसर मिलेगा।

108 मंदिर एवं तुरी गाँव

पलामू के हरिहरगंज स्थित तुरी गाँव में प्रथम मंदिर निर्माण के साथ गाँव को गोद लेकर पहले आदर्श “गौशाला ग्राम” के रूप में विकसित किया जा रहा है।

राष्ट्रीय मीडिया कवरेज

प्रमुख समाचार पत्रों में संस्थापक का संकल्प

दैनिक भास्कर एवं प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित तुरी गाँव मंदिर व गौशाला ग्राम अभियान

दैनिक भास्कर (पलामू भास्कर - 10 फरवरी 2026)

“आदिदेव के देशभर में बन रहे 108 मंदिरों में से एक पलामू में बन रहा — गांव से गोशाला अवधारणा को मूर्त रूप दिखेगा”

दैनिक भास्कर पलामू समाचार कतरन फोटो पर क्लिक कर पूरी खबर पढ़ें
प्रभात खबर (12 फरवरी 2026)

“आदिदेव मंदिर के साथ गांव को समृद्ध बनाने का संकल्प — तुरी गांव को गोद लेकर विकास कार्य: मोहित पूनम रंजन”

प्रभात खबर समाचार कतरन फोटो पर क्लिक कर पूरी खबर पढ़ें

माँ वैष्णो देवी के आशीर्वाद से

मोहित पूनम रंजन के इस पावन संकल्प से जुड़कर भारत के गाँवों को आत्मनिर्भर और सनातन संस्कृति को अमर बनाएं।
आपका छोटा सा समर्पण भी एक आदर्श गौशाला ग्राम और 108 पाषाण मंदिरों की नींव बन सकता है।

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